यूपी पुलिस के सिपाही प्रांशु सचान की मौत, एंबुलेंस की देरी की जांच
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में 5 नवंबर 2026 को सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल सिपाही प्रांशु सचान (22) की कानपुर के एलएलआर हैलट अस्पताल ले जाए जाने के बाद मौत हो गई। उनके पिता प्रमोद सचान का कहना है कि भाजपा की पदयात्रा के चलते कानपुर के टाटमिल चौराहे पर लगे जाम में एंबुलेंस करीब डेढ़ घंटे फंसी रही। कानपुर यातायात पुलिस ने देरी की अवधि और मौत से जाम के संबंध पर परिवार के दावे से असहमति जताई है। मामले की जांच एसीपी ट्रैफिक को सौंपी गई है।
फतेहपुर के बक्सर मोड़ पर डंपर ने बाइक को टक्कर मारी
प्रांशु 2025 बैच के सिपाही थे और अंबेडकर नगर के टांडा थाने में तैनात थे। कानपुर के घाटमपुर थाना क्षेत्र के मोतीपुर गांव के रहने वाले प्रांशु परिवार के इकलौते बेटे थे। उनके पिता प्रमोद किसान हैं। उनकी मां का नाम विभा सचान और बहन का नाम चांदनी सचान है।
प्रांशु 4 नवंबर को कानपुर देहात, कानपुर नगर, फतेहपुर और रायबरेली में अदालत के समन तामील कराने के लिए अंबेडकर नगर से निकले थे। रसूलाबाद और बिधनू में समन तामील कराने के बाद वह 5 नवंबर को फतेहपुर जा रहे थे। रास्ते में उनके पिता मिले और प्रांशु उनकी बाइक पर सवार हो गए।
दोपहर करीब 12 बजे कल्याणपुर क्षेत्र के बक्सर मोड़ के पास पीछे से आ रहे तेज रफ्तार डंपर ने बाइक को टक्कर मार दी। दोनों सड़क पर गिर गए। रिपोर्ट के मुताबिक, डंपर का पहिया प्रांशु के पेट के ऊपर से गुजर गया। उनके पिता को मामूली चोटें आईं और डंपर चालक मौके से भाग गया। ग्रामीणों ने डायल 112 पर सूचना दी। कल्याणपुर पुलिस दोनों को स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गई, जहां डॉक्टरों ने प्रांशु की गंभीर हालत देखकर उन्हें कानपुर के एलएलआर हैलट अस्पताल रेफर कर दिया।
पिता ने कहा, टाटमिल चौराहे पर डेढ़ घंटे फंसी एंबुलेंस
प्रमोद सचान के मुताबिक, एंबुलेंस दोपहर करीब 12:30 बजे स्वास्थ्य केंद्र से निकली और करीब 1:30 बजे टाटमिल चौराहे पर पहुंची। उन्होंने बताया कि भाजपा की ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा के चलते वहां करीब तीन किलोमीटर लंबा जाम लगा था। उनके अनुसार, एंबुलेंस चौराहे पर करीब डेढ़ घंटे फंसी रही। वहां से निकलने के बाद भी कई जगह यातायात बाधित था। परिवार के मुताबिक, एंबुलेंस शाम करीब 4:30 बजे अस्पताल पहुंची।
प्रमोद ने बताया कि उन्होंने कई बार एंबुलेंस से उतरकर यातायात पुलिस और आसपास खड़े लोगों से हाथ जोड़कर रास्ता खुलवाने की गुहार लगाई। इस दौरान उन्होंने हाथों और गमछे से बेटे का खून रोकने की कोशिश की। अस्पताल में डॉक्टरों ने प्रांशु को मृत घोषित कर दिया। प्रमोद के अनुसार, डॉक्टरों ने कहा कि उन्हें अस्पताल लाने में देर हो गई थी। उनका कहना है कि अगर एंबुलेंस जाम में न फंसती तो बेटे की जान बच सकती थी।
पुलिस ने अलग समय बताया, चालक का बयान दर्ज
कानपुर के डीसीपी ट्रैफिक अभयनाथ त्रिपाठी के अनुसार, एंबुलेंस फतेहपुर से दोपहर करीब 2:40 बजे रवाना हुई और डॉक्टरों ने शाम करीब 4 बजे स्वरूप नगर पुलिस को मौत की सूचना दी। पुलिस ने कहा कि करीब 50 से 60 किलोमीटर की दूरी को देखते हुए एक घंटा 20 मिनट का अंतर उस समय की परिस्थितियों में सामान्य यात्रा अवधि के करीब था। यातायात पुलिस का कहना है कि मौत टाटमिल के जाम के कारण नहीं हुई।
कानपुर नगर पुलिस ने अपने बयान में शोक जताया और अस्पताल के रिकॉर्ड का हवाला देते हुए करीब 60 किलोमीटर के सफर में लगभग एक घंटा 20 मिनट लगने की बात कही। पुलिस ने एंबुलेंस के लिए ग्रीन कॉरिडोर की व्यवस्था का भी जिक्र किया। एंबुलेंस चालक का बयान दर्ज किया गया है और जांच जारी है।
6 नवंबर को पोस्टमार्टम के बाद प्रांशु का पार्थिव शरीर मोतीपुर गांव ले जाया गया, जहां पुलिस ने उन्हें अंतिम सलामी दी।