हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से आपूर्ति बाधित, पंजाब में NDA सरकार बनने का अमित शाह का दावा

हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से आपूर्ति बाधित, पंजाब में NDA सरकार बनने का अमित शाह का दावा

चंडीगढ़: हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल से गुरुग्राम, फरीदाबाद और नूंह समेत करीब 15 जिलों में बिजली आपूर्ति बाधित हुई है। लंबे बिजली कटों से घरेलू उपभोक्ताओं और उद्योगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बिजली पर निर्भर पंप बंद होने से कई इलाकों में पानी की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है।

बिजली आपूर्ति से जुड़ी हजारों शिकायतों और लंबे कटों के बीच कई स्थानों पर लोग सड़कों पर उतर आए। कुछ क्षेत्रों में सड़कें जाम किए जाने की भी खबरें हैं। इस बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पंजाब में NDA सरकार बनने के दावे ने राजनीतिक चर्चा तेज कर दी है।

निजी कंपनी को वितरण लाइसेंस देने का विरोध

हरियाणा बिजली नियामक आयोग (HERC) ने 19 अक्टूबर को निजी कंपनी Eleven Power Private Limited को गुरुग्राम और नूंह में 25 वर्षों के लिए समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस दिया था। इससे राज्य की सरकारी बिजली वितरण कंपनियों DHBVN और UHBVN के साथ प्रतिस्पर्धा की स्थिति बनेगी।

बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने इस फैसले को निजीकरण की दिशा में कदम बताते हुए 22 से 24 अक्टूबर तक हड़ताल का ऐलान किया। कर्मचारियों ने आशंका जताई है कि इससे नौकरियों, किसानों और आम उपभोक्ताओं को मिलने वाली सब्सिडी वाली बिजली पर असर पड़ सकता है। उन्होंने सरकारी बिजली ढांचा निजी हाथों में जाने की चिंता भी जताई है।

गुरुग्राम में 12 घंटे में 3,000 से अधिक शिकायतें

हड़ताल 21 अक्टूबर की रात करीब 10 बजे शुरू हुई। गुरुग्राम में 12 घंटे के भीतर बिजली से जुड़ी 3,000 से अधिक शिकायतें दर्ज हुईं। कई आवासीय सेक्टरों, ग्रामीण क्षेत्रों और औद्योगिक इलाकों में लंबे समय तक बिजली नहीं आई।

सेक्टर 37, कादीपुर और दौलताबाद जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में इकाइयों को जेनरेटर का सहारा लेना पड़ा। हालांकि, लंबे समय तक जेनरेटर के भरोसे काम चलाने में भी दिक्कतें आईं। फरीदाबाद, पलवल, हिसार और अंबाला सहित अन्य क्षेत्रों में भी हड़ताल का असर दिखाई दिया।

सरकार ने की हड़ताल वापस लेने की अपील

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कर्मचारियों से हड़ताल वापस लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार कर्मचारियों के साथ खड़ी है और HERC के फैसले को अपीलेट ट्रिब्यूनल फॉर इलेक्ट्रिसिटी (APTEL) में चुनौती देगी।

ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि सरकार ने निजी वितरण लाइसेंस के लिए कोई आवेदन आमंत्रित नहीं किया था और वह आयोग के फैसले का विरोध कर रही है।

स्थिति संभालने के लिए बिजली सब-स्टेशनों पर पुलिस तैनात की गई और अधिकारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गईं। इसके बावजूद हड़ताल जारी रहने से उपभोक्ताओं की परेशानी बनी रही।

अमित शाह ने पंजाब में NDA सरकार बनने का किया दावा

इसी दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली में एक कार्यक्रम में दावा किया कि पंजाब की जनता फैसला कर चुकी है और राज्य में NDA की सरकार बनेगी। उनका यह बयान 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों के संदर्भ में आया। उन्होंने आम आदमी पार्टी की सरकार पर नशे और शासन से जुड़े आरोप भी लगाए।

इससे पहले भाजपा पंजाब में अपने दम पर सरकार बनाने की बात करती रही है। ऐसे में शाह के बयान में “NDA सरकार” के उल्लेख को राजनीतिक हलकों में शिरोमणि अकाली दल (SAD) के साथ संभावित गठबंधन के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, किसी गठबंधन की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

भाजपा और शिरोमणि अकाली दल का पुराना गठबंधन 2020 के किसान आंदोलन के बाद टूट गया था। शाह के ताजा बयान से 2027 के चुनाव से पहले दोनों दलों के संभावित समीकरणों को लेकर अटकलें बढ़ी हैं।

बिजली संकट के बीच राजनीतिक आलोचना

सोशल मीडिया और विपक्षी प्रतिक्रियाओं में हरियाणा के बिजली संकट तथा पंजाब से जुड़े राजनीतिक बयान को लेकर सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए गए हैं। आलोचकों का कहना है कि बिजली और पानी जैसी रोजमर्रा की समस्याओं के समाधान पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए।

कुछ सोशल मीडिया पोस्ट में यह आशंका भी जताई गई कि गलत नीतियों का असर पंजाब के लोगों पर भी पड़ सकता है। ये प्रतिक्रियाएं राजनीतिक आलोचना का हिस्सा हैं।

23 अक्टूबर 2026 की सुबह तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, हड़ताल 24 अक्टूबर तक जारी रहने वाली है। हरियाणा सरकार HERC के फैसले को APTEL में चुनौती देने की प्रक्रिया में है। बिजली आपूर्ति बाधित होने से आम लोगों और उद्योगों की परेशानी बनी हुई है, जबकि पंजाब में संभावित NDA गठबंधन को लेकर आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।